महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर “शिंदे ग़ायब हैं” ब्रेकिंग बन गई है। मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की अहम बैठक में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नहीं पहुंचे। साथ ही उनके खासमखास माने जाने वाले नेता भारत गोगावाले भी नदारद रहे। अब सवाल उठ रहा है – “ये सिर्फ छुट्टी थी या सियासी स्ट्रैटजी?” नाराज़ क्यों हैं शिंदे गुट? खबर है कि शिंदे और उनके समर्थक खुद को सरकार में साइडलाइन महसूस कर रहे हैं। अजित पवार गुट को मिल रही तवज्जो से शिवसेना खेमे की भौंहे चढ़ी हैं। मंत्रियों…
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Eknath Shinde की सख्त टिप्पणी: कार्यकर्ता बनो, थप्पड़वाड़ नहीं
महाराष्ट्र की राजनीति में दाल से निकला नया तड़का अब तक ठंडा नहीं हुआ है। थप्पड़ की गूंज इतनी ज़ोरदार थी कि अब डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे खुद सामने आ गए हैं। बिना नाम लिए शिंदे ने अपने ‘परिवार’ के कुछ विधायकों को साफ़-साफ़ कहा – “अगर आप कुछ ऊल-जुलूल करोगे, तो बदनामी मेरी होगी!” रेट्रो रिव्यू: “वो कौन थी?” – और आज तक किसी को नहीं पता शिंदे बोले- मैं बॉस नहीं हूं! एमएलए हॉस्टल की कैंटीन में मिली बासी दाल पर एक कर्मचारी को विधायक संजय गायकवाड़ ने…
Read Moreस्ट्रॉबेरी, हल्दी और बांस के बाद शिंदे बो रहे एवोकाडो ‘हरियाली मिशन’ में छुपा है क्या ?
महाराष्ट्र की राजनीति में जहां एक तरफ राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के मिलन की सुगबुगाहट है, वहीं दूसरी ओर एकनाथ शिंदे सीधे गांव की मिट्टी में उतरकर “पौधारोपण की राजनीति” कर रहे हैं। हाँ जी, डिप्टी सीएम साहब खुद फावड़ा-कुदाल उठाकर खेत में एवोकाडो उगा रहे हैं। क्योंकि जब दिल्ली में राज चलाना भारी लगे, तो सतारा की मिट्टी ही सच्चा आराम देती है! You may also like: “जब हर दिन शादी लगे अदालत, और बीवी बोले – आपत्ति है! तब काम आएगी हमारी सलाह एवोकाडो: फल नहीं, ‘फ्यूचर पॉलिसी’…
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